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बादाम से विभिन्न रोगों में उपचार Treatment of almonds in various diseases

बादाम से विभिन्न रोगों में उपचार Treatment of almonds in various diseases

पागल कुत्ते के काटने पर :Crazy dog ​​bites:

4 ग्राम बादाम की मींगी की मात्रा को शहद के साथ मिलाकर खाने से पागल कुत्ते का जहर दूर हो जाता है।

Eating 4 grams of almond powder with honey removes poison of mad dog.
दांतों का मंजन :Toothbrush:
  • बादाम का छिलका जलाकर उसमें नमक मिलाकर दांतों पर रगड़ने से दांत साफ और चमकीले हो जाते हैं। सुगन्ध के लिए इसमें कपूर और इलायची भी मिला लेते हैं।
  •  Burning the peel of almond and adding salt to it, rubbing it on the teeth makes the teeth clean and shiny. Kapoor and cardamom are also added to it for fragrance.

  • बादाम के फल के छिलके को जलाकर, कोयला बनाकर उसकी बुकनी 100 ग्राम लेनी चाहिए। इसमें माजूफल, छोटी इलायची के दाने, फुलाई हुई फिटकरी और कपूर का 10-10 ग्राम चूर्ण मिलाकर खरल में बारीक पीसकर सुरक्षित रख लेते हैं। इस दंत मंजन को दांतों पर घिसने से दांत साफ होते हैं तथा मसूढ़े भी मजबूत होते हैं।
  •  After burning the peel of almond fruit, making coal, 100 grams of its powder should be taken. Mix 10 grams of powdered nutmeg, small cardamom seeds, puffed alum, and camphor and grind them finely in a mortar and keep them safe. By rubbing this tooth on the teeth, the teeth become clean and the gums are also strong.

  • बादाम का छिलका जलाकर ढक दें। दूसरे दिन पीसें और जितनी राख हो उसका पांचवा भाग फिटकरी या सेंधानमक मिलाकर पीस लेते हैं। इस पाउडर से मंजन करने से दांत तो साफ होते ही हैं इसके साथ ही दांतों के सारे रोग भी दूर हो जाते हैं।
  •  Burn almond peel and cover it. On the second day, grind it and grind one-fifth of the ashes mixed with alum or rock salt. By brushing with this powder, the teeth are not only clean, as well as all the diseases of teeth are also removed.
भिलावां (एक जंगली पेड़) से उठे हुए छालों :Blisters raised from Bhilwan (a wild tree):

बादाम को घिसकर भिलावां (एक जंगली पेड़) से उठे हुए छालों पर लगाने से लाभ मिलता है।

Grinding almonds and applying it on the blisters raised from Bhilawan (a wild tree) is beneficial.
कनखजूरे के कांटे चुभ जाने पर :When a thorn prick pierces:

कनखजूरे के कांटे चुभ जाने पर बादाम का तेल लगाने से लाभ मिलता है।

Applying almond oil on prickly prickles provides relief.


धातु वृद्धि के लिए :For metal enhancement:
15 ग्राम गाय के घी में 10 ग्राम मक्खन या ताजा खोवा, बादाम, चीनी, कंकोल, शहद और इलायची मिलाकर 7 दिन तक लेना चाहिए। बादाम की गिरी को गर्म पानी में भिगो देते हैं। इसके बाद बादाम के छिलके निकालकर बारीक पीस लेते हैं। इसे दूध में मिलाकर उबालें और खीर बनाएं। इसमें चीनी और घी मिलाकर खाने से बल और वीर्य की वृद्धि होती है और दिमाग भी तेज होता है।

10 grams of butter or freshly digested in 15 grams cow's ghee, mixed with almonds, sugar, kankol, honey and cardamom should be taken for 7 days. Soak almond kernel in warm water. After this, peel the almonds and grind them finely. Boil it in milk and make kheer. Eating sugar and ghee in it increases the strength and semen and also stimulates the brain.
बाजीकरण अनुभूत योग :Bajikaran Anubhav Sum
  • असगंध, बड़े गोखरू, सालेमंपजा, सफेद मूसली, विदारीकंद, अकरकरा, शतावरी को बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बारीक चूर्ण बनाकर रख लेते हैं। इस चूर्ण को 2-2 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम मिश्री मिले हुए गर्म दूध के साथ लेते रहने पर कामोत्तेजना जागृत होती है और स्तम्भन शक्ति में वृद्धि होती है। इस योग को सेब के रस के साथ मिलाकर 1 कप की मात्रा में रोजाना लेते रहने से पौरुष शक्ति की वृद्धि होने लगती है ।
  •  Grind equal quantity of ashgandh, big bunions, salemampaja, white musli, vidarkand, akarakara, asparagus and keep it in fine powder. Taking 2 to 2 grams of this powder with hot milk mixed with sugar candy in the morning and evening, arouses arousal and increases the strength of the penis. Mixing this juice with apple juice and taking 1 cup daily regularly increases the strength of the person.

  • 500 ग्राम मुलहठी, 200 ग्राम आंवला चूर्ण, 200 ग्राम शुद्ध कौंच के बीज का चूर्ण, 200 ग्राम इमली के बीज की गिरी, 50 ग्राम छोटी पीपल को लेकर एकसाथ पीसकर एक जगह मिलाकर रख लेते हैं। 25 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम इसको लेकर मिश्री मिले हुए दूध के साथ खाते रहने से पुरुषों में अपूर्व कामशक्ति बढ़ती है। स्त्रियों की कामशिथिलता, स्तनों का ढीलापन, शीघ्रपतन आदि में भी यह प्रयोग लाभकारी होता है। इस प्रयोग के आधे घंटे बाद 1 गिलास सेब का जूस पीना लाभकारी होता है।
  •  Grind 500 grams of gooseberry, 200 grams of gooseberry powder, 200 grams of pure crushed seed powder, 200 grams of tamarind seed kernel, 50 grams of small peppers together and keep it in one place. Eating 25 grams of this mixture with milk mixed with sugar candy in the morning and evening increases the extraordinary work power in men. This use is also beneficial in the sexuality of women, loosening of breasts, premature ejaculation etc. Drinking 1 glass of apple juice after half an hour is beneficial.
मस्तिष्क को शीतलता (ठंडक) के लिए : For brain coldness:

बादाम को छीलकर आग पर सेंककर चीनी के साथ खाना चाहिए। इसके एक घन्टे के बाद मक्खन और चीनी खानी चाहिए। इसके बाद दिन में तीन बार बादाम का तेल सिर में लगाने से दिमाग मे ठंडक पैदा होती है।

The almonds should be peeled and baked on fire and eaten with sugar. Butter and sugar should be eaten after one hour of this. After this, applying almond oil three times a day in the head causes coolness in the brain.
Dr.Manoj Bhai Rathore
Ayurveda doctor
Email id:life.panelbox@gmail.com
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6. प्रत्येक पैथी में कुछ दवाईयां कुछ रोगों पर बहुत ही असरदार रूप से प्रभावकारी होती हैं।
7. प्रत्येक पैथी का अविष्कार आवश्यकता पड़ने पर ही हुआ है क्योंकि एक जवान और मजबूत आदमी को मसाज, एक्यूप्रेशर,  एक्यूपेंचर, हार्डपेथियों एवं औषधियों द्वारा लाभ पहुंचाया जा सकता है लेकिन असाध्य रोग से पीड़ित, शारीरिक रूप से कमजोर और बूढ़े रोगियों पर इन पेथियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
8. आयुर्वेद और होम्योपैथिक के सिद्धांत बिल्कुल मिलते-जुलते हैं क्योंकि आयुर्वेद से ही होम्योपैथिक की उत्पत्ति हुई है जैसे- जहर को जहर द्वारा ही उतारा जा सकता है, कांटे को कांटे से ही निकाला जा सकता है।
9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
12. जिस प्रकार व्याकरण के पूर्ण ज्ञान के बिना शिक्षक योग्य नहीं हो पाता है, उसी प्रकार से बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हुए बिना किसी प्रकार की औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि हर औषधि के गुण-धर्म और दोष अलग-अलग होते हैं।

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