Skip to main content

असामानय योनिक सराव/Abnormal vaginal infusion

योनिक स्राव क्या होता है और कब उसे असामान्य कहा जाता है/What is vaginal discharge and when it is called abnormal.

ग्रीवा से उत्पन्न श्लेष्मा (म्युकस) का बहाव योनिक स्राव कहलाता है। अगर स्राव का रंग, गन्ध या गाढ़ापन असामान्य हो अथवा मात्रा बहुत अधिक जान पड़े तो हो सकता है कि रोग हो।

The flow of mucus originating from the cervix is ​​called vaginal discharge. If the color, smell, or thickness of the secretion is abnormal or the quantity is too much, then it may be a disease.

किन परिस्थितियों के कारण सामान्य योनिक स्राव में वृद्धि होती है?/Under what conditions does normal vaginal discharge increase?

सामान्य योनिक स्राव की मात्रा में निम्नलिखित स्थितियों में वृद्ध हो सकती है- योनपरक उत्तेजना, भावात्मक दबाव और अण्डोत्सर्ग (माहवारी के मध्य में जब अण्डकोष से अण्डे का सर्जन और विसर्जन होता है)

The amount of normal vaginal discharge can be increased in the following conditions - vaginal stimulation, affective pressure and ovulation (mid-menstrual period when ovulation and excretion of the ovaries from the testicle)

असामान्य योनिक स्राव के क्या कारण होते हैं?/What causes abnormal vaginal discharge?

असामान्य योनिक स्राव के ये कारण हो सकते हैं- (1) योन सम्बन्धों से होने वाला संक्रमण (2) जिनके शरीर की रोधक्षमता कमजोर होती है या जिन्हें मधुमेह का रोग होता है उनकी योनि में सामान्यतः फंगल@यीस्ट नामक संक्रामक रोग हो सकता है।

These causes of abnormal vaginal discharge may be- (1) Infections due to vaginal relationships (2) Those who have weak body immunity or who have diabetes, can have infectious disease in their vagina commonly called fungal @ yeast.

असामान्य योनिक स्राव से कैसे बचा जा सकता है?/How can abnormal vaginal discharge be avoided?

योनिक स्राव से बचने के लिए - To avoid vaginal discharge

(1) जननेन्द्रिय क्षेत्र को साफ और शुष्क रखना जरूरी है।

It is necessary to keep the genitals area clean and dry.

 (2) योनि को बहुत भिगोना नहीं चाहिए (जननेन्द्रिय पर पानी मारना) बहुत सी महिलाएं सोचती हैं कि माहवारी या सम्भोग के बाद योनि को भरपूर भिगोने से वे साफ महसूस करेंगी वस्तुतः इससे योनिक स्राव और भी बिगड़ जाता है क्योंकि उससे योनि पर छाये स्वस्थ बैक्टीरिया मर जाते हैं जो कि वस्तुतः उसे संक्रामक रोगों से बचाते हैं|

The vagina should not be soaked (hitting water on the genitals). Many women think that soaking the vagina after menstruation or sex will make them feel clean, in fact it worsens vaginal discharge because it kills the healthy bacteria on the vagina. That actually protects him from infectious diseases.

 (3) दबाव से बचें।

Avoid pressure.

 (4) योन सम्बन्धों से लगने वाले रोगों से बचने और उन्हें फैलने से रोकने के लिए कंडोम का इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए। 

Condoms must be used to avoid diseases caused by vaginal relationships and to prevent them from spreading.

(5) मधुमेह का रोग हो तो रक्त की शर्करा को नियंत्रण में रखाना चाहिए।

If there is diabetes, blood sugar should be kept under control.

असामान्य योनिक स्राव के लिए क्या डाक्टर से सम्पर्क करना चाहिए?/Should a doctor be contacted for abnormal vaginal discharge?

हां, शीघ्र ही डाक्टर से परामर्श लेना चाहिए। वे आपके लक्षणों की जानकारी लेंगे, जननेन्द्रिय का परीक्षण करेंगे और तदनुसार उपचार बतायेंगे।

Yes, a doctor should be consulted soon. They will take information about your symptoms, test the genitals and give treatment accordingly.



Dr.Manoj Bhai Rathore 
Ayurveda Doctor
Email id:life.panelbox@gmail.com
क्या करे क्या न करे(स्वास्थ्य सुझाव)What to do, what not to do (health tips)
Self site:-see you again search आप फिर से खोज देखें
 yourselfhealthtips.blogspot.com


आवश्यक दिशा निर्देश
1. हमारा आपसे अनुरोध है कि यदि आप किसी भी तरह के रोग से पीड़ित हैं तो आपको अपना इलाज किसी अनुभवी चिकित्सक की देख-रेख में ही कराना चाहिए क्योंकि बिना चिकित्सक की सलाह के दवा लेना और एकसाथ एक से अधिक पैथियों का प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है।
2. अगर हमारी वेबसाइट में दिए गए नुस्खों या फार्मूलों से आपको किसी भी प्रकार की हानि होती है, तो उसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे, क्योंकि इन नुस्खों को गलत तरीके से लेने के कारण ये विपरीत प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक नुस्खों का प्रभाव रोगी की प्रकृति, समय और जलवायु के कारण अलग-अलग होता है।
3. औषधि का सेवन करते समय आपको अपने खान-पान  (पथ्यापथ्य)  का पूरा ध्यान रखना चाहिए  क्योंकि किसी भी रोग में औषधि के प्रयोग के साथ-साथ परहेज भी रोग को ठीक करने में महत्वपू्र्ण भूमिका निभाता है।
4. रोगी को कोई भी दवा देने से पहले यह जानना आवश्यक है कि रोग की उत्पत्ति किस कारण से हुई है। जिस कारण से रोग पैदा हुआ है उसकी पूरी जानकारी रोगी से लेनी बहुत जरूरी होती है, क्योंकि अधूरे ज्ञान के कारण रोगी का रोग कुछ होता है और उसे किसी अन्य रोग की औषधि दे दी जाती है। इसके परिणामस्वरूप रोगी की बीमारी समाप्त होने के बजाय असाध्य रोग में बदल जाती है।
5. शरीर को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाने के लिए शुद्ध आहार की जानकारी बहुत ही जरूरी है, क्योंकि इस जानकारी से आप असाध्य से असाध्य रोग को जड़ से समाप्त कर शरीर को पूर्ण रूप से रोग मुक्त कर सकते हैं।
6. प्रत्येक पैथी में कुछ दवाईयां कुछ रोगों पर बहुत ही असरदार रूप से प्रभावकारी होती हैं।
7. प्रत्येक पैथी का अविष्कार आवश्यकता पड़ने पर ही हुआ है क्योंकि एक जवान और मजबूत आदमी को मसाज, एक्यूप्रेशर,  एक्यूपेंचर, हार्डपेथियों एवं औषधियों द्वारा लाभ पहुंचाया जा सकता है लेकिन असाध्य रोग से पीड़ित, शारीरिक रूप से कमजोर और बूढ़े रोगियों पर इन पेथियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
8. आयुर्वेद और होम्योपैथिक के सिद्धांत बिल्कुल मिलते-जुलते हैं क्योंकि आयुर्वेद से ही होम्योपैथिक की उत्पत्ति हुई है जैसे- जहर को जहर द्वारा ही उतारा जा सकता है, कांटे को कांटे से ही निकाला जा सकता है।
9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
12. जिस प्रकार व्याकरण के पूर्ण ज्ञान के बिना शिक्षक योग्य नहीं हो पाता है, उसी प्रकार से बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हुए बिना किसी प्रकार की औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि हर औषधि के गुण-धर्म और दोष अलग-अलग होते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

Bahrom-oriented (collectopic) womb बाह्रोन्मुख (इकटोपिक) गर्भ

बाह्रोन्मुख गर्भ क्या है?  What is a fetus oriented fetus? बाह्रोन्मुख गर्भ वह जिसमें उर्वरित अण्डे का रोपण किया जाता है और जो गर्भाशय के बाहर विकसित होता है। सामान्यतः ट्यूब मे होता है। प्राकॉतिक रूप में ट्यूब में उसका उर्वरण होता है और फिर वह उर्वरित अण्डा गर्भाशय में जाता है परन्तु नली (ट्यूब) में होने वाले गर्भ में वह ट्यूब में ही रहता है। Bahromatic womb is one in which fertilized eggs are planted and which develop outside the uterus. Usually occurs in the tube. In the natural form, it is exposed in the tube and then it goes into the fertilized egg in the uterus, but in the womb (tube), it stays in the tube itself. बाह्रोन्मुख गर्भ के मुख्य लक्षण क्या हैं?  What are the main symptoms of an outward-facing pregnancy? चार मुख्य लक्षण हैं- अल्पावधि के पीरियडस का अभाव (एमीनोरहोई) पेट में तेज दर्द योनि से रक्त स्राव चक्कर आना, उल्टी होना और बहोशी के दौरे। बाह्रोन्मुख गर्भ का सन्देह होने पर क्या करें?  What to do if there is a suspicion of a multi-faced pregnancy? महिला को ...

ततैया / मधुमख्खी के काटने पर उपचार Treatment on wasp / bee bite

ततैया / मधुमख्खी के काटने पर उपचार Treatment on wasp / bee bite उपचार - 1: Treatment - 1: काटे हुए स्थान पर तुरंत मिटटी का तेल लगाने से भी जलन शांत होती है, और सूजन भी नहीं आती. Applying soil oil immediately to the cut area also calms the burning sensation, and also does not cause inflammation.  उपचार - 2: Treatment - 2: ततैया के काटने पर, काटे हुए स्थान पर तुरंत नीम्बू का रस लगाए, दर्द, जलन और सूजन तुरंत ही ठीक हो जाएंगे. After cutting the wasp, apply lemon juice on the cut site, pain, burning and swelling will be cured immediately. उपचार - 3: Treatment - 3: ततैया के काटे जुए स्थान पर तुरंत खट्टा अचार मलने से, दर्द और जलन में तुरंत राहत मिलती है Rubbing sour pickles in the wasp's yoke area immediately, relieves pain and burning immediately. Dr.Manoj Bhai Rathore    Ayurveda doctor Email id:life.panelbox@gmail.com...

नीम से बालों को मजबूत बनाना और गिरने से रोकना Strengthening hair with neem and preventing fall

नीम से बालों को मजबूत बनाना और गिरने से रोकना Strengthening hair with neem and preventing fall नीम के पत्तों को पानी में खूब उबालें। इसके बाद इसे उतारकर ठंड़ा कर लें। इस पानी से सिर को धोते रहने से बाल मजबूत, काले होते हैं और बालों का गिरना या झड़ना बन्द हो जाता है। Boil neem leaves in plenty of water. After that, take it off and refrigerate. By washing the head with this water, the hair becomes strong, dark and hair fall or fall stops.   नीम का तेल रात को सोने से पहले बालों में लगा लें और सुबह नीम वाले साबुन से सिर को धो लें। कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करने से सिर की जुंए और लीख दूर होती हैं। इसके साथ बाल मजबूत होते हैं।  Apply neem oil to the hair before sleeping at night and wash your head with neem soap in the morning. Head lice and nit are removed by regular consumption for a few days. With this the hair becomes stronger.   नीम का तेल लगाने से बाल फिर से जम जाते हैं।  Applying neem oil causes hair to regrow.   नीम और बेर के पत्त...