Skip to main content

तिल्ली रोग / जिगर सम्बंधित उपचार Spleen disease/Liver treatment

तिल्ली रोग / जिगर सम्बंधित उपचार 

Spleen disease/Liver treatment

 

उपचार - 1:Treatment - 1:

यकृत के रोग में छाछ, हींग का बघार देकर जीरा, नमक और काली मिर्च मिलाकर दोपहर के भोजन के बाद पिने से यकृत के रोगों में आराम मिलता है.

Mixing cumin, salt and black pepper with buttermilk, asafoetida in liver disease, drinking it after lunch provides relief in liver diseases.

उपचार - 2:Treatment - 2:

लीची काफी स्वास्थ्यवर्धक होती है| लीची दिल, मस्तिषक और जिगर को शक्ति प्रदान करती है जिससे इनसे सम्बंधित बिमारियां जल्दी ठीक होती है.

Litchi is very healthy. Litchi provides strength to the heart, brain and liver, which helps in curing the related diseases quickly.

उपचार - 3:Treatment - 3:

मीठा खरबूज खाने से जिगर के रोग में अद्वितीय लाभ होता है.

Eating sweet melon has unique benefits in liver disease.

उपचार - 4:Treatment - 4:

छोटे बच्चो को जिगर सम्बन्धी बीमारी होने पर पपीता खिलाना चाहिए| पपीता खाने से पेट साफ़ होता है और जिगर को भी राहत मिलती है.

Small children should be fed papaya in case of liver disease. Eating papaya clears the stomach and also relieves the liver.

उपचार - 5:Treatment - 5:

3-8 साल तक के बच्चो को यकृत सम्बन्धी विकार होने पर करेले का रस रोज पिलाने से रोग में सुधार होता है.

Children of 3-8 years of age have liver disorders by drinking bitter gourd juice daily, the disease improves.

उपचार - 6:Treatment - 6:

100 ग्राम पानी में आधा नीम्बू निचोड़कर, थोडा नमक मिलाकर पी जाए| कुछ दिनों तक दिन में 3 बार ऐसा करने से यक्र्त के रोग ठीक हो जाते है.

Squeeze half a lemon in 100 grams of water, add a little salt and drink it. By doing this thrice a day for a few days, diseases of the liver are cured.

उपचार - 7:Treatment - 7:

जिनके जिगर/यकृत में विकार हो उनको प्रतिदिन 1 गिलास मीठे अनार का रस जरूर पीना चाहिए| इससे जल्दी लाभ होता है.

Those who have a liver / liver disorder must drink 1 glass of sweet pomegranate juice every day. It benefits quickly.

उपचार - 8:Treatment - 8:

2-3 जामुन भूखे पेट खाने से यकृत का रोग शीघ्र ठीक होता है.

Eating 2-3 berries starved stomach cures liver disease quickly.


Dr.Manoj Bhai Rathore 
Ayurveda doctor
Email id:life.panelbox@gmail.com
क्या करे क्या न करे(स्वास्थ्य सुझाव)What to do, what not to do (health tips)
Self site:-see you again search आप फिर से खोज देखें
 yourselfhealthtips.blogspot.com

आवश्यक दिशा निर्देश
1. हमारा आपसे अनुरोध है कि यदि आप किसी भी तरह के रोग से पीड़ित हैं तो आपको अपना इलाज किसी अनुभवी चिकित्सक की देख-रेख में ही कराना चाहिए क्योंकि बिना चिकित्सक की सलाह के दवा लेना और एकसाथ एक से अधिक पैथियों का प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है।
2. अगर हमारी वेबसाइट में दिए गए नुस्खों या फार्मूलों से आपको किसी भी प्रकार की हानि होती है, तो उसके लिए आप स्वयं जिम्मेदार होंगे, क्योंकि इन नुस्खों को गलत तरीके से लेने के कारण ये विपरीत प्रभाव उत्पन्न कर सकते हैं। इसके अलावा आयुर्वेदिक नुस्खों का प्रभाव रोगी की प्रकृति, समय और जलवायु के कारण अलग-अलग होता है।
3. औषधि का सेवन करते समय आपको अपने खान-पान  (पथ्यापथ्य)  का पूरा ध्यान रखना चाहिए  क्योंकि किसी भी रोग में औषधि के प्रयोग के साथ-साथ परहेज भी रोग को ठीक करने में महत्वपू्र्ण भूमिका निभाता है।
4. रोगी को कोई भी दवा देने से पहले यह जानना आवश्यक है कि रोग की उत्पत्ति किस कारण से हुई है। जिस कारण से रोग पैदा हुआ है उसकी पूरी जानकारी रोगी से लेनी बहुत जरूरी होती है, क्योंकि अधूरे ज्ञान के कारण रोगी का रोग कुछ होता है और उसे किसी अन्य रोग की औषधि दे दी जाती है। इसके परिणामस्वरूप रोगी की बीमारी समाप्त होने के बजाय असाध्य रोग में बदल जाती है।
5. शरीर को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाने के लिए शुद्ध आहार की जानकारी बहुत ही जरूरी है, क्योंकि इस जानकारी से आप असाध्य से असाध्य रोग को जड़ से समाप्त कर शरीर को पूर्ण रूप से रोग मुक्त कर सकते हैं।
6. प्रत्येक पैथी में कुछ दवाईयां कुछ रोगों पर बहुत ही असरदार रूप से प्रभावकारी होती हैं।
7. प्रत्येक पैथी का अविष्कार आवश्यकता पड़ने पर ही हुआ है क्योंकि एक जवान और मजबूत आदमी को मसाज, एक्यूप्रेशर,  एक्यूपेंचर, हार्डपेथियों एवं औषधियों द्वारा लाभ पहुंचाया जा सकता है लेकिन असाध्य रोग से पीड़ित, शारीरिक रूप से कमजोर और बूढ़े रोगियों पर इन पेथियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
8. आयुर्वेद और होम्योपैथिक के सिद्धांत बिल्कुल मिलते-जुलते हैं क्योंकि आयुर्वेद से ही होम्योपैथिक की उत्पत्ति हुई है जैसे- जहर को जहर द्वारा ही उतारा जा सकता है, कांटे को कांटे से ही निकाला जा सकता है।
9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
12. जिस प्रकार व्याकरण के पूर्ण ज्ञान के बिना शिक्षक योग्य नहीं हो पाता है, उसी प्रकार से बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हुए बिना किसी प्रकार की औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि हर औषधि के गुण-धर्म और दोष अलग-अलग होते हैं।

Comments

Popular posts from this blog

ततैया / मधुमख्खी के काटने पर उपचार Treatment on wasp / bee bite

ततैया / मधुमख्खी के काटने पर उपचार Treatment on wasp / bee bite उपचार - 1: Treatment - 1: काटे हुए स्थान पर तुरंत मिटटी का तेल लगाने से भी जलन शांत होती है, और सूजन भी नहीं आती. Applying soil oil immediately to the cut area also calms the burning sensation, and also does not cause inflammation.  उपचार - 2: Treatment - 2: ततैया के काटने पर, काटे हुए स्थान पर तुरंत नीम्बू का रस लगाए, दर्द, जलन और सूजन तुरंत ही ठीक हो जाएंगे. After cutting the wasp, apply lemon juice on the cut site, pain, burning and swelling will be cured immediately. उपचार - 3: Treatment - 3: ततैया के काटे जुए स्थान पर तुरंत खट्टा अचार मलने से, दर्द और जलन में तुरंत राहत मिलती है Rubbing sour pickles in the wasp's yoke area immediately, relieves pain and burning immediately. Dr.Manoj Bhai Rathore    Ayurveda doctor Email id:life.panelbox@gmail.com...

Bahrom-oriented (collectopic) womb बाह्रोन्मुख (इकटोपिक) गर्भ

बाह्रोन्मुख गर्भ क्या है?  What is a fetus oriented fetus? बाह्रोन्मुख गर्भ वह जिसमें उर्वरित अण्डे का रोपण किया जाता है और जो गर्भाशय के बाहर विकसित होता है। सामान्यतः ट्यूब मे होता है। प्राकॉतिक रूप में ट्यूब में उसका उर्वरण होता है और फिर वह उर्वरित अण्डा गर्भाशय में जाता है परन्तु नली (ट्यूब) में होने वाले गर्भ में वह ट्यूब में ही रहता है। Bahromatic womb is one in which fertilized eggs are planted and which develop outside the uterus. Usually occurs in the tube. In the natural form, it is exposed in the tube and then it goes into the fertilized egg in the uterus, but in the womb (tube), it stays in the tube itself. बाह्रोन्मुख गर्भ के मुख्य लक्षण क्या हैं?  What are the main symptoms of an outward-facing pregnancy? चार मुख्य लक्षण हैं- अल्पावधि के पीरियडस का अभाव (एमीनोरहोई) पेट में तेज दर्द योनि से रक्त स्राव चक्कर आना, उल्टी होना और बहोशी के दौरे। बाह्रोन्मुख गर्भ का सन्देह होने पर क्या करें?  What to do if there is a suspicion of a multi-faced pregnancy? महिला को ...

नीम से बालों को मजबूत बनाना और गिरने से रोकना Strengthening hair with neem and preventing fall

नीम से बालों को मजबूत बनाना और गिरने से रोकना Strengthening hair with neem and preventing fall नीम के पत्तों को पानी में खूब उबालें। इसके बाद इसे उतारकर ठंड़ा कर लें। इस पानी से सिर को धोते रहने से बाल मजबूत, काले होते हैं और बालों का गिरना या झड़ना बन्द हो जाता है। Boil neem leaves in plenty of water. After that, take it off and refrigerate. By washing the head with this water, the hair becomes strong, dark and hair fall or fall stops.   नीम का तेल रात को सोने से पहले बालों में लगा लें और सुबह नीम वाले साबुन से सिर को धो लें। कुछ दिनों तक नियमित रूप से सेवन करने से सिर की जुंए और लीख दूर होती हैं। इसके साथ बाल मजबूत होते हैं।  Apply neem oil to the hair before sleeping at night and wash your head with neem soap in the morning. Head lice and nit are removed by regular consumption for a few days. With this the hair becomes stronger.   नीम का तेल लगाने से बाल फिर से जम जाते हैं।  Applying neem oil causes hair to regrow.   नीम और बेर के पत्त...