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ईसबगोल विभिन्न रोगों में उपचार Isabgol treatment in various diseases

ईसबगोल विभिन्न रोगों में उपचार Isabgol treatment in various diseases

अमीबिका (पेचिश):

100 ग्राम ईसबगोल की भूसी में 50-50 ग्राम सौंफ और मिश्री को 2-2 चम्मच की मात्रा में रोजाना 3 बार सेवन करने से लाभ मिलता है।

 Amoebic (dysentery):

Taking 50-50 grams of fennel and 2 to 2 spoons of sugar candy in 100 grams of isabgol husk thrice a day is beneficial.

कांच खाने पर:

ईसबगोल की भूसी 2 चम्मच की मात्रा में दूध के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से लाभ होता है।

On eating glass:

Taking 2 spoons of isabgol husk with milk thrice a day is beneficial.

जोड़ों का दर्द:

ईसबगोल की पुल्टिश (पोटली) पीड़ित स्थान पर बांधने से जोड़ों के दर्द में लाभ मिलता है।

 Joint pain:

Tying isabgol's poultice on the affected place provides relief in joint pain.

पायरिया:

ईसबगोल को सिरके में मिलाकर दांतों पर मालिश करने से पायरिया के रोग में लाभ मिलता है।

Pyorrhea:

Mixing isabgol in vinegar and massaging it on the teeth provides relief in pyorrhea.
 
स्वप्नदोष:

ईसबगोल और मिश्री मिलाकर एक-एक चम्मच एक कप दूध के साथ सोने से 1 घंटा पहले लें और सोने से पहले पेशाब करके सोयें।

 Nightmare

Mix isabgol and sugar candy and take one spoon of it with one cup of milk 1 hour before bedtime and urinate before sleeping and sleep.

आंव:

1 चाय की चम्मच ईसबगोल गर्म दूध में फुलाकर रात्रि को सेवन करें। प्रात: दही में भिगोकर, फुलाकर उसमें सोंठ, जीरा मिलाकर 4 दिन तक लगातार सेवन करने से आंव निकलना बंद हो जाएगा।

 Ammo:

Take 1 tea spoon of Isabgol in hot milk and consume it at night. Soaking in curd in the morning, after bloating, adding dry ginger and cumin to it, taking it continuously for 4 days will stop the bloating.

 शीघ्रपतन:

ईसबगोल, खसखस और मिश्री सभी की 5-5 ग्राम मात्रा को पानी में मिलाकर सेवन करने से शीघ्रपतन (धातु का जल्दी निकल जाना) का रोग दूर हो जाता है।

 Premature Ejaculation:
Taking 5-5 grams of isabgol, poppy seeds and sugar candy mixed with water is useful to cure premature ejaculation.

पेशाब की जलन:

1 गिलास पानी में 3 चम्मच ईसबगोल की भूसी को भिगोकर उसमें स्वाद के मुताबिक बूरा (खांड या चीनी) डालकर पीने से पेशाब की जलन दूर हो जाती है।

 Urination irritation:

Soak 3 teaspoons of isabgol husk in 1 glass of water and add boora (khand or sugar) according to the taste, drinking it helps in burning sensation of urine.

श्वेतप्रदर:

ईसबगोल को दूध में देर तक उबालकर, उसमें मिश्री मिलाकर खाने से स्त्रियों के श्वेत प्रदर में बहुत लाभ मिलता है।

Blennenteria:
Boiling isabgol in milk for a long time, mixing sugar candy in it and eating it provides a lot of benefit in the white leucorrhoea of ​​women.
 
सिर दर्द:

ईसबगोल को बादाम के तेल में मिलाकर मस्तक पर लेप करने से सिर दर्द दूर हो जाता है।

 Headache:
Mixing isabgol in almond oil and applying it on the forehead ends headache.

कान का दर्द:

ईसबगोल के लुवाब में प्याज का रस मिलाकर, हल्का सा गर्म करके कान में बूंद-बूंद करके डालने से कान के दर्द में लाभ मिलता है।

 Ear ache:

Mixing onion juice in Isabgol's luwab, heating it a little bit and putting it drop by drop in the ear provides relief in ear pain.

  Dr.Manoj Bhai Rathore
Ayurveda doctor
Email id:life.panelbox@gmail.com
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6. प्रत्येक पैथी में कुछ दवाईयां कुछ रोगों पर बहुत ही असरदार रूप से प्रभावकारी होती हैं।
7. प्रत्येक पैथी का अविष्कार आवश्यकता पड़ने पर ही हुआ है क्योंकि एक जवान और मजबूत आदमी को मसाज, एक्यूप्रेशर,  एक्यूपेंचर, हार्डपेथियों एवं औषधियों द्वारा लाभ पहुंचाया जा सकता है लेकिन असाध्य रोग से पीड़ित, शारीरिक रूप से कमजोर और बूढ़े रोगियों पर इन पेथियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
8. आयुर्वेद और होम्योपैथिक के सिद्धांत बिल्कुल मिलते-जुलते हैं क्योंकि आयुर्वेद से ही होम्योपैथिक की उत्पत्ति हुई है जैसे- जहर को जहर द्वारा ही उतारा जा सकता है, कांटे को कांटे से ही निकाला जा सकता है।
9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
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