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अमर बेल Amar Bell

अमर बेल Amar Bell

अमर बेल एक पराश्रयी (दूसरों पर निर्भर) लता है, जो प्रकृति का चमत्कार ही कहा जा सकता है। बिना जड़ की यह बेल जिस वृक्ष पर फैलती है, अपना आहार उससे रस चूसने वाले सूत्र के माध्यम से प्राप्त कर लेती है। अमर बेल का रंग पीला और पत्ते बहुत ही बारीक तथा नहीं के बराबर होते हैं।

Amar Bell brings a parasite (dependent on others), which can only be called a miracle of nature. The tree without which it spreads on the root, gets its food from its formula through juice sucking formula. The color of the immortal vine is yellow and the leaves are very fine and equal.

अमर बेल पर सर्द ऋतु में कर्णफूल की तरह गुच्छों में सफेद फूल लगते हैं। बीज राई के समान हल्के पीले रंग के होते हैं। अमर बेल बसन्त ऋतु (जनवरी-फरवरी) और ग्रीष्म ऋतु (मई-जून) में बहुत बढ़ती है और शीतकाल में सूख जाती है। जिस पेड़ का यह सहारा लेती है, उसे सुखाने में कोई कसर बाकी नहीं रखती है।

White flowers appear on bunches like amphibians in the winter season on the immortal vine. The seeds are light yellow like rye. The Amar vine grows a lot in the spring (January – February) and summer (May – June) and dries in the winter. The tree it resorts to, it leaves no stone unturned to dry.

 विभिन्न भाषाओं में नाम :

 संस्कृत आकाश बल्ली, आकाशवल्ली। हिंदी अमर बेल, आकाश बेल। मराठी निर्मुली, अमरबेल। गुजराती अकास बेल, अमरबेल। बंगाली स्वर्णलता, आलोक लता। तैलगू नुलु तेगा। अरबी कसूसेहिन्द फारसी अफ्तीमून। 

Names in different languages:

 Sanskrit Akash Balli, Akashvalli. Hindi Amar Bell, Akash Bell. Marathi Nirmuli, Amarabel. Gujarati Akas Bell, Amarabel. Bengali Swarnalata, Alok Lata. Telugu Nulu Tega Arabic Kasusehind Persian Aftimoon.

अंग्रेजी डोडर लैटिन कस्कुटा रिफ्लेक्सा रंग :

 अमर बेल का रंग पीला होता है। 
 
English Dodger Latin Cuscuta Reflexa Color: 

The color of the immortal vine is yellow. 

स्वाद : 

इसका स्वाद चरपरा और कषैला होता है।

Taste:

 Its taste is piquant and bitter.

स्वरूप : 

अमर बेल (आकाश बेल) डोरे के समान पेड़ों पर फैलती है। इनमें जड़ नहीं होती तथा रंग पीला तथा फूल सफेद होते हैं। 

Format:

The immortal vine (sky vine) spreads on the trees like a string. They have no root and the color is yellow and the flowers are white.

स्वभाव : 

अमर बेल गर्म एवं रूखी प्रकृति की है। इस लता के सभी भागों का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

Nature:

The immortal vine is of warm and dry nature. All parts of this vine are used as medicine.

मात्रा (खुराक) : 

अमर बेल को लभगभ 20 ग्राम की मात्रा में प्रयोग कर सकते हैं।

Quantity (dosage): 

Amar vine can be used in a quantity of 20 grams.

गुण :

आकाश बेल ग्राही, कड़वी, आंखों के रोगों को नाश करने वाली, आंखों की जलन को दूर करने वाली तथा पित्त कफ और आमवात को नाश करने वाली है। यह वीर्य को बढ़ाने वाली रसायन और बलकारक है।

Properties:

Aakash Bell is receptive, bitter, eliminates eye diseases, eliminates eye irritation and eliminates bile phlegm and rheumatism. It is a semen-enhancing chemical and force.
        

Dr.Manoj Bhai Rathore 
Ayurveda doctor
Email id:life.panelbox@gmail.com
क्या करे क्या न करे(स्वास्थ्य सुझाव)What to do, what not to do (health tips)
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1. हमारा आपसे अनुरोध है कि यदि आप किसी भी तरह के रोग से पीड़ित हैं तो आपको अपना इलाज किसी अनुभवी चिकित्सक की देख-रेख में ही कराना चाहिए क्योंकि बिना चिकित्सक की सलाह के दवा लेना और एकसाथ एक से अधिक पैथियों का प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है।
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5. शरीर को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाने के लिए शुद्ध आहार की जानकारी बहुत ही जरूरी है, क्योंकि इस जानकारी से आप असाध्य से असाध्य रोग को जड़ से समाप्त कर शरीर को पूर्ण रूप से रोग मुक्त कर सकते हैं।
6. प्रत्येक पैथी में कुछ दवाईयां कुछ रोगों पर बहुत ही असरदार रूप से प्रभावकारी होती हैं।
7. प्रत्येक पैथी का अविष्कार आवश्यकता पड़ने पर ही हुआ है क्योंकि एक जवान और मजबूत आदमी को मसाज, एक्यूप्रेशर,  एक्यूपेंचर, हार्डपेथियों एवं औषधियों द्वारा लाभ पहुंचाया जा सकता है लेकिन असाध्य रोग से पीड़ित, शारीरिक रूप से कमजोर और बूढ़े रोगियों पर इन पेथियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
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9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
12. जिस प्रकार व्याकरण के पूर्ण ज्ञान के बिना शिक्षक योग्य नहीं हो पाता है, उसी प्रकार से बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हुए बिना किसी प्रकार की औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि हर औषधि के गुण-धर्म और दोष अलग-अलग होते हैं।

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