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इलायची से विभिन्न रोगों में उपचार Cardamom treatment in various diseases

इलायची से विभिन्न रोगों में उपचार Cardamom treatment in various diseases

स्वप्नदोष:

आंवले के रस में इलायची के दाने और ईसबगोल को बराबर मात्रा में मिलाकर 1-1 चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से स्वप्नदोष में लाभ होता है।

Nightmare

Mix equal quantity of cardamom seeds and isabgol in amla juice and take 1 spoon of it twice a day, it provides relief in nightmares.

आंखों में जलन होने अथवा धुंधला दिखने पर:

इलायची के दाने और शक्कर बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। फिर इसके 4 ग्राम चूर्ण में एरंड का चूर्ण डालकर सेवन करें। इससे मस्तिष्क और आंखों को ठण्डक मिलती है तथा आंखों की रोशनी तेज होती है।
Eye irritation or blurred vision:
Grind equal quantity of cardamom seeds and sugar. Then add castor powder to its 4 grams powder and take it. It cools the brain and eyes and makes the eyes light faster.


कफ:

इलायची के दाने, सेंधानमक, घी और शहद को मिलाकर पीने से लाभ मिलता है।

 Cuffs:

Mixing cardamom seeds, rock salt, ghee and honey is beneficial to drink.

वीर्यपुष्टि:
इलायची के दाने, जावित्री, बादाम, गाय का मक्खन और मिश्री को मिलाकर रोजाना सुबह सेवन करने से वीर्य मजबूत होता है।

Cum Confirmation:
By mixing cardamom seeds, mace, almonds, cow butter and sugar candy, taking it daily in the morning strengthens the semen.

मूत्रकृच्छ (पेशाब करने में कष्ट या जलन):

इलायची के दानों का चूर्ण शहद में मिलाकर खाने से मूत्रकृच्छ (पेशाब में जलन) में लाभ मिलता है।

Urinalysis (difficulty urinating or burning):
Eating powder of cardamom seeds mixed with honey provides relief in urination (burning sensation in urine).

 
उदावर्त (मलबंध) रोग पर:

थोड़ी सी इलायची लेकर घी के दिये पर सेंकने के बाद उसको पीसकर बने चूर्ण में शहद को मिलाकर चाटने से उदावर्त रोग में लाभ मिलता है।

 On the disease (amalgam):

After baking a little cardamom on ghee, after grinding it, lick it in the powder made by grinding it and lick it provides relief in chronic disease.

मुंह के रोग पर:

इलायची के दानों के चूर्ण और सिंकी हुई फिटकरी के चूर्ण को मिलाकर मुंह में रखकर लार को गिरा देते हैं। इसके बाद साफ पानी से मुंह को धो लेते हैं। रोजाना दिन में 4-5 बार करने से मुंह के रोग में आराम मिलता है।

On Mouth Disease:

Mix the powder of cardamom seeds and the powder of grated alum and put saliva in the mouth and drop the saliva. After this, wash the mouth with clean water. Doing 4-5 times a day daily provides relief in mouth disease.

 
सभी प्रकार के दर्द:

इलायची के दाने, हींग, इन्द्रजव और सेंधानमक का काढ़ा बना करके एरंड के तेल में मिलाकर देना चाहिए। इससे कमर, हृदय, पेट, नाभि, पीठ, कोख (बेली), मस्तक, कान और आंखों में उठता हुआ दर्द तुरन्त ही मिट जाता है |

All types of pain:
Make a decoction of cardamom seeds, asafoetida, Indrajav and rock salt and mix it with castor oil. This causes pain that arises in the waist, heart, stomach, navel, back, womb (belly), head, ears and eyes immediately.

 
सभी प्रकार के बुखार:

इलायची के दाने, बेल और विषखपरा को दूध और पानी में मिलाकर तक तक उबालें जब तक कि केवल दूध शेष न रह जाए। ठण्डा होने पर इसे छानकर पीने से सभी प्रकार के बुखार दूर हो जाते हैं।

All types of fever:

Boil cardamom seeds, vine and venison in milk and water until only the milk remains. In the case of cold, filtering it and drinking it cures all types of fever.

 
कफ-मूत्रकृच्छ:

गाय का पेशाब, शहद या केले के पत्ते का रस, इन तीनों में से किसी भी एक चीज में इलायची का चूर्ण मिलाकर पिलाने से लाभ होता है।
Kapha-diuresis:

Mixing powder of cardamom powder in any one of these three things is beneficial for cow's urine, honey or banana leaf juice.


जमालघोटा का विष:

इलायची के दानों को दही में पीसकर देने से लाभ मिलता है।

Jamalaghota venom:

Grind cardamom seeds in curd and give it benefits.


Dr.Manoj Bhai Rathore
Ayurveda doctor
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5. शरीर को स्वस्थ और शक्तिशाली बनाने के लिए शुद्ध आहार की जानकारी बहुत ही जरूरी है, क्योंकि इस जानकारी से आप असाध्य से असाध्य रोग को जड़ से समाप्त कर शरीर को पूर्ण रूप से रोग मुक्त कर सकते हैं।
6. प्रत्येक पैथी में कुछ दवाईयां कुछ रोगों पर बहुत ही असरदार रूप से प्रभावकारी होती हैं।
7. प्रत्येक पैथी का अविष्कार आवश्यकता पड़ने पर ही हुआ है क्योंकि एक जवान और मजबूत आदमी को मसाज, एक्यूप्रेशर,  एक्यूपेंचर, हार्डपेथियों एवं औषधियों द्वारा लाभ पहुंचाया जा सकता है लेकिन असाध्य रोग से पीड़ित, शारीरिक रूप से कमजोर और बूढ़े रोगियों पर इन पेथियों का उपयोग नहीं किया जा सकता है।
8. आयुर्वेद और होम्योपैथिक के सिद्धांत बिल्कुल मिलते-जुलते हैं क्योंकि आयुर्वेद से ही होम्योपैथिक की उत्पत्ति हुई है जैसे- जहर को जहर द्वारा ही उतारा जा सकता है, कांटे को कांटे से ही निकाला जा सकता है।
9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
12. जिस प्रकार व्याकरण के पूर्ण ज्ञान के बिना शिक्षक योग्य नहीं हो पाता है, उसी प्रकार से बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हुए बिना किसी प्रकार की औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि हर औषधि के गुण-धर्म और दोष अलग-अलग होते हैं।

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