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जामुन रोगों की रामबाण औषिधि है, ये इन सब का काल है Jamun is the panacea of ​​diseases, it is the time of all these

 जामुन रोगों की रामबाण औषिधि है, ये इन सब का काल है Jamun is the panacea of ​​diseases, it is the time of all these

1. प्रदर रोग:Leucorrhoea:
  • जामुन की ताजी छाल को छाया में सुखाकर कूट-पीस छान लें। इसे 5-5 ग्राम की मात्रा में दूध या पानी के साथ सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर में आराम मिलता है।
  • Dry the fresh bark of the berries in shade and sieve it. Taking 5-5 grams of it with milk or water in the morning and evening provides relief in leucorrhoea.
  • जामुन के पत्ते का रस 10 से 20 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से रक्तप्रदर नष्ट होता है। इसके बीजों का चूर्ण मधुमेह में लाभकारी होता है।
  •  Taking 10 to 20 grams of juice of jambule leaves in the morning and evening ends blood pressure. The powder of its seeds is beneficial in diabetes.

  • छाया में सुखाई जामुन की छाल का चूरन 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार पानी के साथ लेने से कुछ दिनों में ही श्वेतप्रदर का रोग नष्ट हो जाता है।
  •  In the shade, taking 1 teaspoon of suran berries bark bark with water thrice a day, white leucorrhoea is cured within a few days.
2. अपच: Indigestion:

 जामुन का सिरका 1 चम्मच को पानी में मिलाकर पीने से अपच में लाभ होता है।
 Drinking 1 teaspoon of berries vinegar mixed with water is beneficial in indigestion.
3. जिगर का रोग:Liver disease:
  • जामुन के पत्तों का रस (अर्क) निकालकर 5 ग्राम की मात्रा में 4-5 दिन सेवन करने से यकृत वृद्धि मिट जाती है।
  •  Taking juice of jambule leaves (extract), taking 5 grams in 4-5 days, removes liver growth.

  • 200-300 ग्राम बढ़िया पके जामुन रोजाना खाली पेट खाने से जिगर की खराबी दूर होती है।
  • Eating 200-300 grams of fine ripe berries on an empty stomach every day removes liver dysfunction.
4. घाव:Wound:

 जामुन की छाल के काढ़े से घाव को धोना फायदेमंद माना गया है।
  Washing wound with decoction of bark of berries is considered beneficial.
5. पथरी:Calculus:
  • जामुन की गुठलियों को सुखा लें तथा पीसकर चूर्ण बनाकर रखें। आधा चम्मच चूर्ण पानी के साथ सुबह-शाम लें। इससे गुर्दे की पथरी ठीक हो जाती है।
  • Dry the kernels of berries and grind them and keep the powder. Take half a teaspoon of powder with water in the morning and evening. It cures kidney stones.
  • पका हुआ जामुन खाने से पथरी रोग में आराम होता है। गुठली का चूर्ण दही के साथ खाएं। इससे पथरी नष्ट हो जाती है।
  •  Eating ripe berries provides relief in appendicitis. Eat kernels powder with curd. The stone is destroyed by this.

  • रोज जामुन खाने से गुर्दे की पथरी धीरे-धीरे खत्म होती है।
  •  Kidney stones are slowly eliminated by eating berries daily.
6. अम्लपित्त: Acidity:

 जामुन के 1 चम्मच रस को थोड़े-से गुड़ के साथ लेने से अम्लपित्त में लाभ मिलता है।
 Taking 1 teaspoon juice of berries with some jaggery provides relief in acidity.
7. यकृत का बढ़ना:Liver enlargement:
  • 5 ग्राम की मात्रा में जामुन के कोमल पत्तों का रस निकालकर उसको कुछ दिनों तक पीते रहने से यकृत वृद्धि से छुटकारा मिलता है।
  • Taking 5 grams juice of soft leaves of jambule and drinking it for a few days relieves liver growth.
  • आधा चम्मच जामुन का सिरका पानी में घोलकर देने से यकृत वृद्धि से आराम मिलता है।
  •  Mixing half a teaspoon of vinegar vinegar in water provides relief from liver enlargement.
8. प्यास अधिक लगना:More thirst:
  • जामुन के पत्तों का रस निकालकर 7 से 14 मिलीलीटर पीने से प्यास का अधिक लगना बंद हो जाता है।
  • Drinking 7 to 14 ml of juice of jambule leaves stops excessive thirst.
  • जामुन के सूखे पत्तों का काढ़ा बनाकर 14 से 28 मिलीलीटर काढ़े में 5 से 10 ग्राम चीनी मिलाकर दिन में 3 बार पीने से बुखार में प्यास का लगना कम हो जाता है।
  • Make a decoction of dried leaves of berries and mix 5 to 10 grams of sugar in 14 to 28 ml decoction and drink it thrice a day to reduce fever and thirst.
  • जामुन का मीठा गूदा खाने से या उसका रस पीने से अधिक आराम मिलता है।
  • Eating sweet pulp of berries or drinking its juice provides more relief.

Dr.Manoj Bhai Rathore
Ayurveda doctor
Email id:life.panelbox@gmail.com
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9. रोगी के लक्षणों की जांच के दौरान चिकित्सक को तीन बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए, पहला-देखना,  दूसरा-स्पर्श  (छूना)  और तीसरा- प्रश्न करना या रोगी से सवाल पूछना। महान ऋषि ‘सुश्रुत’ के अनुसार कान,  त्वचा,  आंख,  जीभ, नाक इन  5 इन्द्रियों के माध्यम से किसी भी तरह के रोग की वास्तविकता की आसानी से पहचान की जा सकती है।
10. चिकित्सक को चाहिए कि, वह तीमारदार  (रोगी की देखभाल करने वाला)  से रोगी की शारीरिक ताकत,  स्थिति,  प्रकृति आदि की पूरी जानकारी लेने के बाद ही उसका इलाज करे।
11. चिकित्सक को इलाज करने से पहले रोगी को थोड़ी-सी दवा का सेवन कराके इस बात का अध्ययन करना चाहिए कि यह दवा रोगी की शारीरिक प्रकृति के अनुकूल है या नहीं।
12. जिस प्रकार व्याकरण के पूर्ण ज्ञान के बिना शिक्षक योग्य नहीं हो पाता है, उसी प्रकार से बीमारी के बारे में पूरी जानकारी हुए बिना किसी प्रकार की औषधि का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि हर औषधि के गुण-धर्म और दोष अलग-अलग होते हैं।

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